चीनी का उत्पादन 317 लाख टन हुआ-अब अधिकतर मिलें बंद हुई नई दिल्ली, 6 जून एनएनएस)। गन्ने का उत्पादन कम होने एवं चीनी की अतिरिक्त खपत इथेनॉल बनाने में होने से चीनी का उत्पादन गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम हुआ है तथा नए सीजन आने तक भी सकल उत्पादन कम रह जाने की संभावना प्रबल है। गन्ने का मुख्य उत्पादन यूपी मध्य प्रदेश महाराष्ट्र कर्नाटक आदि राज्यों में होता है। इसके अलावा आंशिक रूप में पूर्वी भारत में भी बिजाई होती है। बीते सीजन में बरसात कम होने से गन्ने का ग्रोथ कम रहा है, जिससे सकल उत्पादन में कमी रही है। गन्ने का पिराई सत्र वर्ष 2023 अक्टूबर माह से चल रहा है तथा 30 सितंबर तक चलेगा, लेकिन अब तक चीनी का कुल उत्पादन 316.70 लाख टन हुआ है, जिसमें 3137.80 लाख टन गन्ने की पिराई हुई है। गौरतलब है कि देश में 534 चीनी मिलों ने गन्ने की पिराई शुरू किया था, जिसमें 531 चीनी मिलें बंद हो चुकी है, केवल तीन मिलों में ही गन्ने की पिराई हो रही है। गत वर्ष भी इतने ही चीनी मिलों ने उत्पादन शुरू किया था, जिसमें अब तक 516 चीनी मिलें ही बंद हुई थी, शेष 18 चीनी मिलें अब तक चल रही थी तथा गन्ने की पिराई होती रही, जिसमें 326.10 लाख टन चीनी उक्त अवधि तक बनी थी। इस तरह हम देख रहे हैं कि इस बार चीनी मिलें ज्यादा बंद हो गई है, क्योंकि क्षमता के अनुरूप गन्ना नहीं मिल पाया है तथा गन्ने की पिराई भी पिछले पिराई सत्र की तुलना में लगभग 200 लाख टन कम हुई है। हालांकि इस बार गन्ने में चीनी की रिकवरी 10.09 प्रतिशत हुई है, जबकि गत वर्ष यह रिकवरी 9.83 प्रतिशत ही बैठ रही थी। देश में तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों की चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं तथा नया सीजन अब 4 महीने बाद शुरू होगा, इसे देखते हुए चीनी के उत्पादन में कमी रह जाने की संभावना दिखाई दे रही है। वर्तमान में कंपनियों के डीओ 3900/3940 रुपए प्रति कुंटल में बन रहे हैं, इसमें आगे चलकर और इजाफा होने की संभावना दिखाई दे रही है। चीनी के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे होने से आयात की संभावना सस्ते दर पर नहीं लग रही है। दूसरी ओर मिलों में स्टॉक भी कम बच रहा है। बितरक एवं खपत वाली मंडियों में भी ज्यादा माल नहीं है। सभी राज्यों में महाराष्ट्र, चीनी उत्पादन में सबसे आगे रहा है, वहां चीनी का उत्पादन अब तक 110.2 लाख मीट्रिक टन हो चुका है, इसके बाद यूपी दूसरे नंबर पर 103.65 लाख टन उत्पादन करने वाला राज्य है। कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहा है। कुल मिलाकर सकल उत्पादन में कमी है, इन परिस्थितियों में वर्तमान भाव की चीनी में व्यापार करते रहना चाहिए।

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